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बीते पल

Energetic teenager
Abhinav Singh goes back and reflects on the old days that were so Golden. Some memories as we say always remain.
अचानक क्यूँ ऐसा मन को हुआ,
क्यूँ ना पुरानी यादों को टटोला जाये|
दोस्तों की पुरानी फोटो और,
स्कूल की पुरानी पुस्तकों को खोला जाये|
 
यह सब कर,
एक अपनापन सा जगने लगा|
ऐसा पहले भी हुआ है,
न जाने क्यूँ लगने लगा|
सच कहते हैं,
जब कुछ बीत जाये तो,
एक कमी सी लगती है|
तब उसकी कद्र नहीं की,
यह सोच,
आँखों में नमी सी लगती है|
वक़्त हर पल आगे ही क्यूँ जाता है,
सुनहरे बीते पलों को,
फिर से क्यूँ नहीं दिखाता है|
काश वक्त अंगड़ाई लेना सिख ले,
ये सोच,
जिंदगी हसीं सी लगती है|
सच कहते हैं,
जब कुछ बीत जाये तो,
एक कमी सी लगती है|
तब उसकी कद्र नहीं की,
यह सोच,
आँखों में नमी सी लगती है|
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A Ramnavmi Special : रामनवमी पर विशेष

Ram_Navmi1

 

Satish Tehlan here talks about the Ramnavmi and pays his homage to Lord Rama in this insightful piece. 

आज उस हस्ती का जन्मदिवस है जिनका नाम लेना ही अपने आप में अभिवादन है। महात्मा गाँधी जैसे महापुरुष के आखिरी शब्द भी उन्हें ही पुकार रहे थे। कहा जाता है राम नाम सत्य है और वाकई केवल यही सत्य भी है।  राम हिन्दूओं के लिए एक भगवान ही नहीं बल्कि उनके जीवन का एक अटूट अंग हैं। सुबह उठते हैं तो जय श्री राम,किसी से मिलते हैं तो राम-

राम और किसी अनहोनी या भय पर हे राम। राम इस देश में एक ऐसी महिमाशाली विभूतियाँ रहे हैं जिनका अमिट प्रभाव समूचे भारत के जनमानस पर सदियों से अनवरत चलाआ रहा है। राम सदाचार के प्रतीक हैं, और इन्हें “मर्यादा पुरूषोतम” कहा जाता है।

भगवान श्री राम का जन्मदिन रामनवमी एक पर्व के रूप में मनाया जाता है। चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को प्रतिवर्ष नये विक्रम सवंत्सर का प्रारंभ होता है और शुक्ल पक्ष की नवमी को रामजन्मोत्सव जिसे रामनवमी के नाम से जाना जाता है,  मनाया जाता है। रामनवमी, भगवान राम की स्‍मृति को समर्पित है। राम को भगवान विष्णु का अवतार माना जाता है, जो पृथ्वी पर अजेय रावण(मनुष्‍य रूप में असुर राजा) से युद्ध लड़ने के लिए आए। राम राज्‍य (राम का शासन) शांति व समृद्धि की अवधि का पर्यायवाची बन गया है। रामनवमी के दिन, श्रद्धालु बड़ी संख्‍या में उनके जन्‍मोत्‍सव कोमनाने के लिए राम जी की मूर्तियों को पालने में झुलाते हैं।

maryada purshottam ram

मर्यादा पुरुषोत्तम

भगवान विष्णु ने राम रूप में असुरों का संहार करने के लिए पृथ्वी पर अवतार लिया और जीवन में मर्यादा का पालन करते हुए मर्यादा पुरुषोत्तम कहलाए। आज भी मर्यादा पुरुषोत्तम राम का जन्मोत्सव तोधूमधाम से मनाया जाता है पर उनके आदर्शों को जीवन में नहीं उतारा जाता। अयोध्या के राजकुमार होते हुए भी भगवान राम अपने पिता के वचनों को पूरा करने के लिए संपूर्ण वैभव को त्याग 14 वर्ष केलिए वन चले गए और आज देखें तो मर्यादा मर गई लगता है और उसकी याद ही बाकी है तभी तो वैभव की लालसा में ही पुत्र अपने माता-पिता का काल बन रहा है।

राम का जन्म

पुरूषोतम भगवान राम का जन्म चैत्र मास की शुक्ल पक्ष की नवमी को पुनर्वसु नक्षत्र तथा कर्क लग्न में कौशल्या की कोख से हुआ था। यह दिन भारतीय जीवन में पुण्य पर्व माना जाता हैं। इस दिन सरयूनदी में स्नान करके लोग पुण्य लाभ कमाते हैं।

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रामनवमी की पूजा

हिंदू धर्म में रामनवमी के दिन पूजा की जाती है। रामनवमी की पूजा के लिए आवश्‍यक सामग्री रोली, ऐपन, चावल, जल, फूल, एक घंटी और एक शंख हैं। पूजा के बाद परिवार की सबसे छोटी महिला सदस्‍यपरिवार के सभी सदस्‍यों को टीका लगाती है।

रामनवमी की पूजा में पहले देवताओं पर जल, रोली और ऐपन चढ़ाया जाता है, इसके बाद मूर्तियों पर मुट्ठी भरके चावल चढ़ाये जाते हैं। पूजा के बाद आ‍रती कीजाती है और आरती के बाद गंगाजल अथवा सादा जल एकत्रित हुए सभी जनों पर छिड़का जाता है।