Tag Archives: Karma

बीते पल

Energetic teenager
Abhinav Singh goes back and reflects on the old days that were so Golden. Some memories as we say always remain.
अचानक क्यूँ ऐसा मन को हुआ,
क्यूँ ना पुरानी यादों को टटोला जाये|
दोस्तों की पुरानी फोटो और,
स्कूल की पुरानी पुस्तकों को खोला जाये|
 
यह सब कर,
एक अपनापन सा जगने लगा|
ऐसा पहले भी हुआ है,
न जाने क्यूँ लगने लगा|
सच कहते हैं,
जब कुछ बीत जाये तो,
एक कमी सी लगती है|
तब उसकी कद्र नहीं की,
यह सोच,
आँखों में नमी सी लगती है|
वक़्त हर पल आगे ही क्यूँ जाता है,
सुनहरे बीते पलों को,
फिर से क्यूँ नहीं दिखाता है|
काश वक्त अंगड़ाई लेना सिख ले,
ये सोच,
जिंदगी हसीं सी लगती है|
सच कहते हैं,
जब कुछ बीत जाये तो,
एक कमी सी लगती है|
तब उसकी कद्र नहीं की,
यह सोच,
आँखों में नमी सी लगती है|
Advertisements

प्रियतम की वो बाट देखती, अब तक जाने क्यूँ बैठी है?

girl waiting for someone
प्रियतम की वो बाट देखती, अब तक जाने क्यूँ बैठी है?
श्याम सुंदरी ये रात की बगी‍या,
दिन भर सोई,
ऊंघी – अलसी सी,
दिन के ढलते खिल जाती है |
बाट जोहती, राह देखती,
आतूर प्रियतम से मिलने को,
दिल की इक छोटी फरियाद,
बेचैन है साथी को कहने को |
उज्ज्वल शीतल रात की तह में,
अपने जीवन की सच्चाई को ओढ़े,
जब हवा भी ढंड से सिकुड़ी जाती,
वो दग्ध हो रही खुद की ज्वाला में |
हवा से पूछे, रात से पूछे,
अपनी हर इक बात से पूछे –
“द्वार खुला है माली सोया
जब चाहे जो चाहे आये” |
रात बीतती पल पल हर पल…
पूरब से सूरज की परछाई
नभ पर धीरे धीरे बढती,
पक्षी के कलरव की गूँज
माली ले रहा अंगड़ाई |
प्रियतम की वो बाट देखती,
अब तक जाने क्यूँ बैठी है?
क्यूँ नहीं जाती बगिया से बाहर,
अपने प्रेमी प्रियतम से मिलने,
सोच रहा हूं जा कर पुछूं,
क्या कोई परेशानी है?
जाती क्यूँ नहीं उसे-से मिलने,
जिसकी वो दीवानी है |
सोता हुआ वो बूढ़ा माली
लाठी टेकता, लंगड़ाता सा,
अबूझ पहेली, आँखों में प्रश्न लिए
धीरे-धीरे बढ़ता है |
प्यार-भरा वो स्नेहील चुम्बन
वक्त कर रहे, एक पिता का प्यार,
शायद यह वही प्यार था,
जिसने उसको रात में रोका,
अपने साथी से मिलने को.
“ द्वार खुला था आज़ादी थी,
फिर भी वो चुपचाप थी बैठी |”
                                    – by Atul Singh