Tag Archives: Kaifi Azmi

बीते पल

Energetic teenager
Abhinav Singh goes back and reflects on the old days that were so Golden. Some memories as we say always remain.
अचानक क्यूँ ऐसा मन को हुआ,
क्यूँ ना पुरानी यादों को टटोला जाये|
दोस्तों की पुरानी फोटो और,
स्कूल की पुरानी पुस्तकों को खोला जाये|
 
यह सब कर,
एक अपनापन सा जगने लगा|
ऐसा पहले भी हुआ है,
न जाने क्यूँ लगने लगा|
सच कहते हैं,
जब कुछ बीत जाये तो,
एक कमी सी लगती है|
तब उसकी कद्र नहीं की,
यह सोच,
आँखों में नमी सी लगती है|
वक़्त हर पल आगे ही क्यूँ जाता है,
सुनहरे बीते पलों को,
फिर से क्यूँ नहीं दिखाता है|
काश वक्त अंगड़ाई लेना सिख ले,
ये सोच,
जिंदगी हसीं सी लगती है|
सच कहते हैं,
जब कुछ बीत जाये तो,
एक कमी सी लगती है|
तब उसकी कद्र नहीं की,
यह सोच,
आँखों में नमी सी लगती है|
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मेरी माँ

MotherAndSonAbstracted

Continuing our Mother’s Week celebrations, here is another masterpiece by a fabulously talented upcoming poet Syed Bilal. Maa Tujhe Salaam. 

कितनी रातें तू जागी है
कितने दिन रात रोई है ,
तकलीफों को अपनी माँ
मुस्कराहट में संजोयी है ,

कितने जत्नों के बाद जन्मा
तुमने मुझको ऐ अम्मा
मेरी हर आह पे ऐ माँ
तू रो आँचल भिगोई है ,

नमाज़ों में दुआओं में
तूने जन्नत न है मांगी
के मांगी है मेरी बस खैर
मेरी खुशी-आबादी मांगी है ,

ममता  तेरी ओ मेरी माँ
मुझको हौसला दे जाती है
के जाऊं मैं कहीं भी
तेरी बस याद  आती है ,

कितनी  माएँ आज रोती हैं
रास्तों पे वो रहती हैं
के अपनों ने न माना है
घर से उनको निकाला है ,

दुखों में दर्द में रहती हैं
कई तकलीफें सहती हैं
फिर भी बच्चों को अपने
बद-दुआ वो न देती है ,

सुधर जाओ संभल जाओ
माँ का मतलब समझ जाओ
के जन्नत है मुहब्बत है
माँ ही बस ऐसी अज़मत है ,

मेरा वादा है तुझसे माँ
दिल न तेरा दुखाऊंगा
तेरी ख़ुशी -हसी के लिए
मैं तो कुछ भी कर जाऊंगा
के रखूँगा सदा पलकों पे
फ़र्ज़ सारे निभाऊंगा

आपका 
बिलाल