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तेरा रिश्ता बड़ा कमाल पिता

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Satish Tehlan is back with a bang and this time with a wonderful poem continuing our Father’s Day week long celebrations. Awesome read as always. 

ऊँगली पकड़ कर तू ही संभाले,
सिखाता पहली चाल पिता।

कभी घोड़ा बन-कभी कंधे ले,
तूने सहलाए मेरे बाल पिता।

तेरी प्यार भरी इक चुम्बन से,
है खिल जाते मेरे गाल पिता।

मुझे मम्मी अच्छी लगती,
पर देता है सब माल पिता।

तेरी मेहनत, तेरे पसीने से,
मेरे घर की ईंटे लाल पिता।

हर संकट स्वयं झेलता,
है गोवेर्धन सी ढाल पिता।

केवल तेरे ही दम से है,
मेरा घर रहता खुशहाल पिता।

मेरे घर आँगन की बगिया के,
तुम ही हो तरुवर-छाल पिता।

मेरी हिम्मत-शौहरत तुमसे है,
तेरे बिन जीवन बेहाल पिता।

मै कायल हूँ तेरे जज्बे का,
तेरा रिश्ता बड़ा कमाल पिता।

Working Dad walking with son

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मेरी माँ

MotherAndSonAbstracted

Continuing our Mother’s Week celebrations, here is another masterpiece by a fabulously talented upcoming poet Syed Bilal. Maa Tujhe Salaam. 

कितनी रातें तू जागी है
कितने दिन रात रोई है ,
तकलीफों को अपनी माँ
मुस्कराहट में संजोयी है ,

कितने जत्नों के बाद जन्मा
तुमने मुझको ऐ अम्मा
मेरी हर आह पे ऐ माँ
तू रो आँचल भिगोई है ,

नमाज़ों में दुआओं में
तूने जन्नत न है मांगी
के मांगी है मेरी बस खैर
मेरी खुशी-आबादी मांगी है ,

ममता  तेरी ओ मेरी माँ
मुझको हौसला दे जाती है
के जाऊं मैं कहीं भी
तेरी बस याद  आती है ,

कितनी  माएँ आज रोती हैं
रास्तों पे वो रहती हैं
के अपनों ने न माना है
घर से उनको निकाला है ,

दुखों में दर्द में रहती हैं
कई तकलीफें सहती हैं
फिर भी बच्चों को अपने
बद-दुआ वो न देती है ,

सुधर जाओ संभल जाओ
माँ का मतलब समझ जाओ
के जन्नत है मुहब्बत है
माँ ही बस ऐसी अज़मत है ,

मेरा वादा है तुझसे माँ
दिल न तेरा दुखाऊंगा
तेरी ख़ुशी -हसी के लिए
मैं तो कुछ भी कर जाऊंगा
के रखूँगा सदा पलकों पे
फ़र्ज़ सारे निभाऊंगा

आपका 
बिलाल