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इस चिंगारी को एक बार सुलग जाने दो . .

rebel

By Atul Singh

जो बंद रही,
इतने दिनों तक,
अंधकार की कोठरियों मे ।
उस तिल तिल जलती ज्योति को,
इस बार उजियारी फैला जाने दो ॥
.
जो रूह,
उनकी हैवानीयत सह,
आज तक कराहती रही ।
उस रूह को तन से जुदा कर के,
हैवानो से भिड़ जाने दो ॥
.
वो चिंगारी,
जो नस नस में,
गर्म लहू बन बहती रही,
उस गर्म लहू को आज हिया से
लावा बनके फूट जाने दो ॥
.
जो जीवन,
अब तक शून्य रहा,
सांसो की अवलम तारों से ।
उन उखड़ी सांसो की तारों को,
अंतर्मन से जुड़ जाने दो ॥
.
कर उद्विग्न,
ले दीपक को कर मे,
जग मे उजीयारी फैला जाने दो ।
खत्म करे जो तम का अंधेरा,
उस चिंगारी को ,
एक बार, सुलग जाने दो ॥
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जलता जीवन, जलते तुम हम

Burning Woods burning life
By Atul Singh
जलता ज़ीवन जलते तुम हम,
ख़त्म हो गई राहें सब ।
आगे है घनघोर अँधेरा
दुःख की बदली छाई है ।
साथ मिलाकर छोड़ गए सब,
क्यूँ तू संग मेरे आई है ॥
क्यूँ करू तुझसे प्रणय निवेदन,
क्या तू जीवन सार मिला ।
किया तिरस्कार तूने है अब तक,
क्यूँ अब तेरा प्यार जगा ॥
तू ठहरी अलका का वैभव,
पर अवनी का मैं भी पुजारी हूँ ।
प्रेम सिखा कर चली गई जो,
उसका मैं आभारी हूँ ॥
प्रेम है क्या ये तू क्या जाने ,
मीरा की वो मूरत होती ।
जिससे मैंने किया प्रेम था,
प्रेम की सूरत वैसी होती ॥.
क्यूँ डाले बाहों के घेरे ,
करती मुझको आलिंगन ।
मैं तो हूँ एक ठहरा पानी,
क्यूँ तू खोजे उसमे जीवन ॥
उसमे ज़ीवन नही मिलेगा,
फूल प्रेम का नही खिलेगा ।
जलता जीवन मेरा अब तक,
जो प्रेम करेगा वो भी जलेगा ॥
” जो प्रेम करेगा वो भी जलेगा “