Ishaq Se Achha Kya Hai


bilal blog

इश्क में बहने सेअच्छा क्या है
ख्वाबों में रहने से अच्छा क्या है ,
हाले-दिल सुनाने से नहीं होगा मेरा वो
गोया चुप ही रहने से अच्छा क्या है .

रातों में जगने से अच्छा क्या है
रास्तों से लड़ने से अच्छा क्या है ,
बर्बाद करेगा तू , हो जाऊंगा ख़ुशी से मैं
बर्बाद हो फिर से -पनप जाने से अच्छा क्या है .

सजने और संवर जाने से अच्छा क्या है
ग़म है तो क्या , मुस्कुराने से अच्छा क्या है .
सफ़ेद कपड़ों में लिपट जायेंगे इस ज़िन्दगी के बाद
दुनिया के रंगों में रंग जाने से अच्छा क्या है

तेरी चाहत के फंदे में उतर जाने से अच्छा क्या है
जो है किया मना सबने – वो कर जाने से अच्छा क्या है ,
सुना चुका हूँ तेरी साज़िश ज़हर तू ही मुझे देगी
तेरे हाथों का दिया ज़हर पी जाने से अच्छा क्या है .

आपका
बिलाल

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