तू खूबसूरत है बहोत


beautiful

By Syed Bilal

तू खूबसूरत है बहोत

जानती है क्या !
संगेमरमरी मूरत है तू
पहचानती है क्या !
पलकों में तेरी सुबह की
आहट कुबुलाती है
नैन जब खुलते है तेरे
तो सुबहा  मुस्कुराती है ,
मेरी सुबहा और शाम है तू
जानती है क्या !
मेरी सुराही मेरा जाम है तू
पहचानती है क्या !
तू चाँद की करवट है
नदिया का पनघट है
दरिया की सरहद है
जानती है क्या !
रोते हुए चेहरे पे
हसी की दस्तक है
पहचानती है क्या !
आँखें है तेरी दो दीये
रोशन सा इनमे नूर है
मुड़कर जो देखे जिस तरफ
दीवाली छोड़ जाती है
जानती है क्या !
बाहें फैला जो खड़ी होती तू
बारिश तुझपे उतर आती है
पहचानती है क्या !
आपका :
बिलाल
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