यही है वेदना कि मर गई सवेंदना – इंसान ही कर रहा इंसान की अवहेलना


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Our second Hindi writer Satish Tehlan makes you reflect into whats wrong with the modern society in this heart wrenching article. 

कल मैंने इंसान ओर इंसानियत को एक साथ मरते देखा. संवेदनहीनता का वो नजारा देखने को मिला जो बेहद दर्दनाक, शर्मनाक और दिल दहला देने वाला था. बीते कल दोपहर के समय सपरिवार बाइक से शुभ समारोह में ससुराल जा रहे कन्हैया लाल के साथ अशुभ घटना घट गयी. एक लापरवाह ट्रक चालक उन्हें रौंदते हुये फरार हो गया. इस हादसे के बाद व्यक्ति दुर्घटना में बुरी तरह से घायल अपनी पत्नी और आठ माह की बच्ची की मदद के लिए चिल्ला रहा था लेकिन बहरों के शहर में.

वो असहाय युवक अपने घायल 5 वर्षीय बेटे को का हाथ थामे अपनी पत्नी और बच्ची को बचाने के लिए करीब पौन घंटे तक दौड़ – दौड़कर, हाथ जोड़ – जोड़कर राहगीरों से मदद की गुहार लगाता रहा. किसी ने उसकी एक नहीं सुनी और रुकते, देखकर आगे बढ़ जाते. किसी ने भी उन्हें अस्पताल पहुंचाने की जहमत नहीं उठाई और उसकी घायल जीवन – संगिनी और 8 माह की कंजिका ने दर्द से कराहते हुये प्राण त्याग दिये.

अब तक पति का हौंसला और गला दोनों जवाब दे चुके थे और अधमरा अपनी भरी – पूरी ज़िन्दगी की बर्बादी का बेहाल देख निढाल होकर गिर पड़ा. आखिरकार वो बेहोश हो गया. अब उस 5 वर्ष के बेटे जो खुद दर्द से ज्यादा अपनों के हाल से बेहाल था कभी पापा और कभी मम्मी की ऊँगली खींच कर उन्हें उठाने की नाकाम कोशिश में लगा था. 40 मिनट बाद टोल बूथ पर तैनात कर्मी ने सीसीटीवी कैमरे में यह दृश्य देखा तो सभी को उठाकर अस्पताल पहुंचाया. जहाँ महिला और उसकी बच्ची को मृत घोषित कर दिया और कन्हैया लाल अपने बेटे के साथ इलाज कराकर वापस लौट गया.

सीसीटीवी फुटेज से पता चला कि सुंरग से गुजरते वक्त एक ट्रक ने उनकी बाइक को टक्कर मार दी थी. बच्ची और उसकी पत्नी को काफी चोटें आई थी. लेकिन कन्हैया कम घायल हुआ था. सुरंग में नेटवर्क न होने की वजह से मदद के लिए वह किसी को फोन भी नहीं कर सका. समय पर इलाज न मिल पाने के कारण पत्नी और बच्ची की मौत हो गई. कन्हैया इतना बेबस हो गया कि न तो वो इस हालत में था कि अपनी बच्ची और पत्नी का शव उठा कर ले जा सके और ना ही अपने बेटे और खुद का इलाज कराने के लिए अस्पताल जा सका. वह कभी पत्नी गुड्डी और बेटी आरुषि के शव से लिपटकर रो रहा था तो कभी घायल बेटे तनीष को साहस बांध रहा था.

इस हादसे से ने एक बार फिर से ये साबित हो गया है कि हमने “निर्भया” वाले मामले से कोई सबक नहीं लिया है. लोगों के भीतर से इंसानियत खत्म हो गई है. बहाना चाहे कुछ भी हो भागादौड़ी भरी ज़िन्दगी, पुलिस के लफड़े का पचडा या कुछ और पर सच्चाई यह लोगों का ज़मीर मर चुका है और खून पानी हो गया है.

एक कहावत है कि “जा तन लागे वो तन जाने” अर्थात जिस पर गुजरती है वही दर्द का एहसास जानता है.

Roadside story

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